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सब कुछ जानिये किसान हितैषी एफजीआर पोर्टल (FGR Portal) के बीटा वर्जन के बारे में

सब कुछ जानिये किसान हितैषी एफजीआर पोर्टल (FGR Portal) के बीटा वर्जन के बारे में

केंद्र ने छत्तीसगढ़ में बतौर पायलट प्रोजेक्ट किया है लॉन्च

केंद्र सरकार ने राज्य की किसान हितैषी नीतियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय (The Union Ministry of Agriculture) ने 21 जुलाई को छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अपने किसान शिकायत निवारण (FGR) पोर्टल के बीटा वर्जन को लॉन्च किया है। यह एफजीआर पोर्टल (FGR Portal) क्या है, इससे किसानों को क्या मदद मिलेगी, पायलट प्रोजेक्ट क्या है, इससे जुड़ी खास बातें जानिये।

एफजीआर (FGR) -

फार्मर ग्रीवेंस रिड्रेसल (Farmer Grievance Redressal (FGR)) यानी किसान शिकायत निवारण (kisaan shikaayat nivaaran) पोर्टल का बीटा वर्जन केंद्र सरकार की पहल है। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क के अनुसार, छत्तीसगढ़ का चयन राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।



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केंद्रीय मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन आयुक्त को इस कार्यक्रम में किसान प्रतिनिधियों, किसानों और पंचायत अधिकारियों के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों की ऑनलाइन भागीदारी सुनिश्चित करने निर्देशित किया था।

ऑनलाइन पोर्टल सर्विस -

केंद्र सरकार के इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों से जुड़ी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का है। केंद्र की नई योजना के तहत गुरुवार को छत्तीसगढ़ में किसानों की समस्याएं निपटाने ऑनलाइन पोर्टल की वर्चुअल लॉन्चिंग हुई। https://twitter.com/pmfby/status/1549984032548864000

एफजीआर इसलिए तैयार -

किसानों की खेती-किसानी संबंधी समस्याओं के निदान के लिए एफजीआर (FGR) तैयार किया गया है। खास तौर पर फसल बीमा से संबंधित शिकायतों के निपटारे के लिए एफजीआर को बनाया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा फिलहाल इस सुविधा को छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। सकारात्मक परिणाम को देखते हुए बाद में इसे संपूर्ण देश में शुरू करने की योजना है।



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केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के एपीसी डॉ. कमलप्रीत सिंह से एफजीआर (FGR) पोर्टल के बारे में संपर्क साधे रखा।

पीएम फसल बीमा सफल क्रियान्वन -

गौरलतब है केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ का चयन प्रधानमंत्री फसल बीमा के क्रियान्वयन में बढ़िया प्रदर्शन के लिए किया है। प्रदेश ने पीएम फसल बीमा योजना में बेहतर परफॉरमेंस दिखाई है। बीमा दावा राशि के भुगतान में देश का अग्रणी राज्य होने की वजह से छग को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है।

बीटा वर्जन -

कृषि मंत्रालय ने राज्य में किसानों के पंजीयन, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, राजीव गांधी न्याय योजना, मुख्यमंत्री पौधरोपण प्रोत्साहन योजना संबंधी एकीकृत किसान पोर्टल के परिणामों को देखते हुए एफजीआर (FGR) के बीटा वर्जन की शुरूआत छत्तीसगढ़ में की है।

एफजीआर (FGR) पोर्टल कैसे करेगा काम -

वर्चुअली तरीके से 21 जुलाई शुरू एफजीआर के बीटा वर्जन के माध्यम से किसान अपनी खेती-किसानी संबंधी समस्याओं का समाधान कर सकेेंगे। विशेषकर फसल बीमा से संबंधित समस्याओं का निदान इससे हो सकेगा। किसानों द्वारा टेलीफोन अथवा मोबाइल के माध्यम से बताई गई समस्या एवं शिकायत इस पोर्टल में ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। समस्याओं के निदान एवं मौजूदा स्थिति के बारे में किसानों को ऑनलाइन सूचित किया जाएगा।

किसान कॉल कर अपनी शिकायत टोल-फ्री नम्बर 14447 पर कराएं दर्ज :

किसान शिकायत निवारण (एफजीआर) पोर्टल में फसल बीमा से संबंधित शिकायत दर्ज कराने हेतु, किसान भाई टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल करें। कॉल के पश्चात्, किसान की शिकायत कॉल सेन्टर द्वारा दर्ज की जाएगी व साथ ही साथ संबंधित बीमा कंपनी को शिकायत का विवरण प्रेषित कर, निर्धारित समय-सीमा में निराकरण करने हेतु निर्देशित किया जायेगा। किसान शिकायत निवारण पोर्टल के संचालित होने से, किसानों को अब फसल बीमा संबंधी शिकायतों के लिए कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेगें और लिखित आवेदन की भी आवश्यकता नहीं रहेगी। किसान के मोबाईल नंबर पर शिकायत दर्ज कराने का संदेश व शिकायत क्रमांक आयेगा, जिसके माध्यम से शिकायत पोर्टल पर शिकायत की वास्तविक स्थिति का पता ऑनलाईन लगाया जा सकता है।
खुशखबरी: २०० करोड़ के निवेश से इस राज्य में बनने जा रहा है अनुसंधान केंद्र

खुशखबरी: २०० करोड़ के निवेश से इस राज्य में बनने जा रहा है अनुसंधान केंद्र

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आयुष मंत्रालय बदरवाह में अनुसंधान केंद्र निर्माण हेतु २०० करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। यह जम्मू-कश्मीर के कृषकों के लिए हर्ष की बात है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया है, कि जम्मू-कश्मीर में कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप का केंद्र बनने के असीमित अवसर हैं। इसी संबंध में उनका यह भी कहना है, कि जम्मू में उत्पादित होने वाले बांसों का प्रयोग अगरबत्ती समेत विभिन्न प्रकार के आवश्यक उत्पादों के निर्माण हेतु हो सकता है। इस वजह से बांस की खेती के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी तो होगी ही साथ में किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्ट्रॉबेरी व सेब एवं ऐसे अन्य फलों की जीवनावधि को कोल्ड-चेन की उत्तम व्यवस्था के जरिये बढ़ाया जाना संभव है।

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उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर में गैर-इमारती वन उत्पाद (NTFP) में आने वाले पौधे जिनमें मशरूम, गुच्ची एवं अन्य औषधीय पौधे काफी संख्या में मिल जाते हैं। चिनाब घाटी अथवा पीर पंजाल क्षेत्र (राजौरी, पुंछ) उच्च गुणवत्ता वाले शहद एवं एनटीएफपी का केंद्र है। दरअसल, इनकी उचित तरीके से विपणन नहीं हो पाती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया है, कि प्रदेश के जम्मू-कश्मीर औषधीय पादप बोर्ड एवं वन विभाग को साम्मिलित किया, क्योंकि एक सहायक पद्धति के जरिये से उत्पादन, बिक्री और विपणन की आवश्यकता है। 

कृषि संबंधित औघोगिक क्रांति से बेहद मुनाफा हो सकता है

उपरोक्त में जैसा बताया गया है, कि डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आयुष मंत्रालय बदरवाह में अनुसंधान केंद्र निर्माण हेतु २०० करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं।. इसी दौरान मंत्री का कहना है, कि कृषि, बागवानी एवं ग्रामीण विकास की भाँति अनेकों प्रगतिशील क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी संगठनों हेतु निरंतर सहायता की आवश्यकता है। साथ ही उनका कहना है, कि शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय (SKUAST) कश्मीर, को उद्यमिता विकास संस्थान (EDI) के साथ मिलकर भेड़पालन व पशुपालन विभागों को सहायता प्रदान करनी चाहिए। 

किसानों को (एफपीओ) व सहकारी समितियों के जरिये संस्थागत होना चाहिए

बतादें कि, मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है, कि किसानों को सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से संस्थागत होना महत्वपूर्ण है। कृषि एवं बागवानी क्षेत्रों में स्थानीय मांगो पर ध्यान केंद्रित हो, एवं ऐैसे नौजवानों को तैयार करना होगा जिनकी इस क्षेत्र में कार्य करने की रूचि हो। साथ ही, एनजीओ किसानों को फसल बीमा अर्जन हेतु संवेदनशील बनाना अति आवश्यक है, क्योंकि इसकी जम्मू और कश्मीर में बेहद जरूरत है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इस प्रकार के सरकारी संगठनों द्वारा समर्थन हेतु कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में कार्यशील प्रमुख गैर सरकारी संगठनों व अनुसंधान संस्थानों का सम्मिलित होना अति आवश्यक है। बाजार में अच्छी पकड़ हेतु, अधिकारियों द्वारा कोई ऐसी नीति जारी होनी जरूरी है, जो स्थानीय कृषि और बागवानी उत्पादों जैसे अखरोट, सेब व राजमा आदि के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की जिम्मेदारी उठा सके।

इस राज्य सरकार ने किया ऐलान, बेमौसम बारिश की मार से बचेंगे किसान

इस राज्य सरकार ने किया ऐलान, बेमौसम बारिश की मार से बचेंगे किसान

सरकार की तरफ से गीले चावल को इकठ्ठा करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, एक भी दाना भी खराब किए बिना शीघ्र अतिशीघ्र धान का संग्रह पूर्ण कर लेंगे। निरंतर बेमौसम बारिश के चलते किसानों को भारी हानि हो रही है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकारें किसानों को राहत पहुँचाने की घोषणा कर रही हैं। इसी कड़ी में तेलंगाना का भी नाम भी शामिल हो गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव का कहना है, कि किसानों को इस बात की फिकर करने की कोई आवश्यकता नहीं है।​ फसल बर्बाद होने पर उनकी क्षति का क्या होगा? मुख्यमंत्री का कहना है, कि इस बारे में सरकार द्वारा पहले ही तैयारी कर ली है। किसानों को जितना धन सामान्य धान के लिए प्रदान किया जाता है। समान धन उस धान के लिए भी दिया जाएगा, जो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुई है।

मुख्यमंत्री ने कृषि से संबंधित समीक्षा बैठक की है

साथ ही, इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा कृषि विभाग को इस बात का भी अध्ययन करने के लिए बोला गया है, कि ऐसी कौन-सी नीति बनाई जाए, जिससे बेमौसम बारिश के मध्य यासंगी धान की कटाई मार्च से पूर्व ही की जा सके। साथ ही, केसीआर का किसानों को मशवरा है, कि बेमौसम बारिश के चलते तीन-चार दिन कटाई ना की जाए। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि मुख्यमंत्री ने कृषि से जुड़ी समीक्षा बैठक भी की थी। ये भी पढ़े: बेमौसम बरसात से हुए नुकसान का किसानों को मिलेगा मुआवजा, सरकार ने जारी किए करोड़ों रुपये

अनाज की बर्बादी नहीं होने देंगे

राज्य सरकार की ओर से ओलावृष्टि से बर्बाद होने वाली फसल के मुआवजे के रुप में किसानों को 10 हजार प्रति एकड़ प्रदान किया जा रहा है। इस बार सरकार की ओर से गीले चावल को एकत्रित करने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, एक दाना भी खराब किए बिना शीघ्र अतिशीघ्र धान का संग्रह पूर्ण कर लिया जाएगा। नागरिक आपूर्ति विभाग के कमिश्नर अनिल कुमार ने सीएम केसीआर को जानकारी दी कि बेमौसम वर्षा के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परंतु, अनाज एकत्रित होना शीघ्र पूर्ण हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग और किसानों को बदलते मौसम से सबक लेने को कहा ​है। साथ ही, जागरुकता फैलाने की भी बात कही है। उन्होंने किसानों को चावल की जल्दी रोपाई करने को कहा, जिससे धान की कटाई मार्च के माह तक संपन्न हो पाए।

सीएम ने अधिकारियों को किसानों के लिए समयानुसार अलर्ट जारी करने को कहा है

मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को और वैज्ञानिक तौर पर अध्ययन करने को कहा है। साथ ही, किसानों में जागरुकता फैलाने के लिए भी बोला है। प्राकृतिक आपदा को लेकर पूर्णतय सतर्क रहने एवं किसानों को समयानुसार जानकारी देने के साथ उनमें जागरुकता उत्पन्न करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है, कि अधिकारी वक्त-वक्त पर किसानों के लिए अलर्ट जारी करते रहें। मुख्यमंत्री का कहना है, कि कृषि विभाग को लोअर लेवल से हाई लेवल तक के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत और ज्यादा गतिशील रूप से कार्य करने के साथ-साथ राज्य सरकार की कृषि नीतियों एवं उद्देश्यों को बेहतरीन ढ़ंग से समझने की जरूरत है।